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विद्यालय परिचय

भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना एवं उत्कृष्ट शिक्षा का संगम

आचार्य रघुवीर इण्टर कॉलेज

आचार्य रघुवीर इण्टर कॉलेज, रघुवीर नगर, रूमा, कानपुर एक ऐसा शिक्षण संस्थान है जो भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय के लिए समर्पित है।

विद्यालय भारतीय संस्कृति, शिक्षण-पद्धति तथा उच्च आदर्शों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। विद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्रदान करना ही नहीं वरन् विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र एवं नेतृत्व क्षमता का समग्र विकास करना भी है।

स्थापना

राष्ट्रोत्थान हेतु ज्ञानमार्ग के पुजारी, भारतीय जनसंघ के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आचार्य रघुवीर जी ने जन-जन को आंदोलित कर उनमें राष्ट्रीय अस्मिता, आत्मगौरव एवं स्वाभिमान की भावना जागृत की। उन्होंने वैचारिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक चेतना तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी के सम्मान एवं स्वाभिमान के पथ पर समाज को अग्रसर करने का सतत प्रयास किया।

इन्हीं विचारों के प्रसार हेतु समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया की चुनावी सभा को संबोधित करने जाते समय 14 मई 1963 को रघुवीर नगर, हाथीपुर ग्राम सभा के निकट इसी स्थल पर डॉ. आचार्य रघुवीर जी की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और स्वतंत्र भारत के इस युगदृष्टा मनीषी का निधन हो गया।

आचार्य जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से भारतीय जनसंघ, कानपुर के तत्कालीन जिला मंत्री स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद अवस्थी तथा प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री प्रेमचंद्र गुप्ता के सौजन्य से 'आचार्य रघुवीर इण्टर कॉलेज', रघुवीर नगर, रूमा, कानपुर की स्थापना की गई। विद्यालय भारतीय संस्कृति, शिक्षा-पद्धति एवं उच्च आदर्शों के अनुसार संचालित किया जा रहा है।

आज यह संस्थान हजारों विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संस्कार एवं राष्ट्रनिर्माण का प्रेरणास्रोत बनकर समाज एवं राष्ट्र की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

हमारा दृष्टिकोण

दृष्टि

प्रचण्ड तेजोमय शारीरिक बल प्रबल आत्म विश्वास युक्त बौद्धिक क्षमता एवं निस्सीम भाव सम्पन्ना मनः शक्ति का अर्जन कर अपने जीवन को निस्पृह भाव से भारत माँ के चरणों में अर्पित करना ही हमारा परम साध्य है।

मिशन

इस प्रकार की राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का विकास करना है जिसके द्वारा ऐसी युवा पीढी का निर्माण हो सके जो हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो, शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, एवं आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण विकसित हो तथा जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलता पूर्वक कर सके और उसका जीवन ग्रामीण, वनवासी, गिरिकन्दराओं एवं झुग्गी-झोपडियों में निवास करने वाले दीन-दुःखी, अभावग्रस्त अपने बान्धवों को सामाजिक कुरीतियों, शोषण एवं अभाव से मुक्त कराकर राष्ट्र जीवन को समरस, सुसम्पन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिये समर्पित हो ।

हमारे मूल्य

  • राष्ट्र प्रथम
  • भारतीय संस्कृति एवं संस्कार
  • अनुशासन एवं चरित्र निर्माण
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  • सामाजिक उत्तरदायित्व
  • नेतृत्व एवं व्यक्तित्व विकास
"वयं राष्ट्रे जागृयाम"

शिक्षा वही है जो मनुष्य को ज्ञान, संस्कार एवं आत्मविकास के मार्ग पर अग्रसर करे।